Land Registry New Rule 2026: भारत सरकार ने 1 जनवरी 2026 से संपत्ति (Property) से जुड़े कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव लागू किए हैं। ये नए नियम जमीन, मकान, दुकान और प्लॉट की रजिस्ट्री से लेकर बंटवारे तक की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देंगे। इन बदलावों का उद्देश्य पारिवारिक विवादों को कम करना और बुजुर्गों व महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करना है।
यहाँ 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले 5 सबसे महत्वपूर्ण नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. माता-पिता की सेवा न करने पर वापस ली जा सकेगी संपत्ति
नए कानून के तहत बुजुर्ग माता-पिता के हितों की रक्षा के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।
- नियम: यदि बच्चे अपने माता-पिता की सेवा या देखभाल नहीं करते हैं, तो माता-पिता द्वारा बच्चों को दी गई या उनके नाम ट्रांसफर की गई संपत्ति (गिफ्ट डीड) को कानूनी रूप से वापस लिया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह बच्चों की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। “मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट” के तहत ट्रिब्यूनल को ऐसे बच्चों को घर से बेदखल करने का अधिकार भी दिया गया है।
2. पिता की संपत्ति पर बेटे का अधिकार और रहने की अनुमति
बेटों के अधिकारों को लेकर चली आ रही पुरानी धारणाओं पर अब कानूनी स्पष्टता आ गई है।
- स्व-अर्जित संपत्ति: यदि पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से घर बनाया है या जमीन खरीदी है, तो बेटा उस पर अपना कानूनी हक नहीं जता सकता।
- रहने का अधिकार: बेटा अपने माता-पिता के घर में केवल तब तक रह सकता है जब तक माता-पिता की अनुमति हो। अनुमति वापस लेने पर बेटे को घर खाली करना होगा, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं।
3. भाइयों के बीच जमीन के बंटवारे की नई प्रक्रिया
पारिवारिक संपत्ति और भाइयों के बीच होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए सरकार ने बंटवारे के नियमों को सरल बना दिया है।
- सहमति की जरूरत नहीं: अब यदि कोई हिस्सेदार संयुक्त जमीन (Joint Property) में से अपना हिस्सा अलग करना चाहता है, तो उसे अन्य हिस्सेदारों की अनिवार्य सहमति की आवश्यकता नहीं होगी। वह सीधे आवेदन कर अपना हिस्सा अलग करवा सकता है।
- डिजिटल रिकॉर्ड: इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई है।
4. बेटियों के अधिकार और दामाद की स्थिति पर स्पष्टता
महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को और अधिक मजबूत किया गया है।
- बेटियों का हक: अब बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर ही कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। शादी के बाद भी बेटी का अपने पिता की संपत्ति पर हक बरकरार रहता है।
- दामाद का अधिकार: दामाद का अपने ससुराल की संपत्ति पर कोई कानूनी हक नहीं होता, जब तक कि ससुर ने कानूनी तौर पर संपत्ति उसके नाम न की हो।
5. जमीन अधिग्रहण और उचित मुआवजे का नया नियम
सरकार द्वारा विकास कार्यों (सड़क, रेलवे आदि) के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के नियमों को और अधिक सख्त बनाया गया है।
- उचित मुआवजा: अब बिना उचित और पूर्ण मुआवजा दिए किसी भी व्यक्ति को उसकी जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता।
- पारदर्शिता: अधिग्रहण की प्रक्रिया अब मानवीय और पारदर्शी होगी, जिसमें प्रभावित परिवार के पुनर्वास का भी ध्यान रखा जाएगा।
निष्कर्ष और सलाह
ये नए नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुके हैं। यदि आपके नाम पर कोई भी अचल संपत्ति है, तो इन नियमों को समझना आपके लिए अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी पेचीदगी से बचा जा सके।
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